खिड़की

मेरी खिड़की के बाहर एक बेचैन सा सागर रहता है क्षितिज से भी दूर तक, ऊंचाइयों एवं गहराइयों में लहराता हुआ सा वो कुछ यूँ बहता है मानो मंजिल का पता ही नहीं, न ही जानने की परवाह है बस इस अनर्गल से कलह में घुले हुए रोष को, बेबस होकर कुछ यूँ सहता है कि दसोContinue reading “खिड़की”

बारिश

ना ही रिमझिम सी , ना ही घनघोर सी एक खामोश से एहसास सी मखमली बूंदों की चादर सी खामोशियों में ही सब कुछ कह जाने वाली  … आज कुछ अलग सी है ये बारिश … कहीं छुपा के रखी हुई यादों को जगाने वाली सहमी सी , घबरायी सी खुल के बरसने से शर्मायी सीContinue reading “बारिश”

वो सुबह

वो सुबह न जाने कहाँ है , जिसकी पहली किरण में नए दिन का प्रकाश है एक नयी शुरुआत का, नए उत्साह का एहसास है यह वो सुबह नहीं है , जिसमे पक्षियों का कलरव खिलखिलाता संगीत है और जिसकी ठंडी हवा में भीग जाने की मन में आस है जिसकी ओस की बूंदों केContinue reading “वो सुबह”

Myth

                Floundering through the clouds of emotions My worlds, my hopes, my cravings Emotions, myriad as myths Breathing life in to my thoughts, or Turning them into a turmoil, Myriad as myths, uncountable, unflinching, flowing- thoughts Storming through the constant of breath To the upheaval of a gasp,Continue reading “Myth”

अक्सर देखा है …

रात को सुबह में ढलते तो अक्सर देखा है पर नहीं मिला  कभी वो लम्हा जब रात का वो  स्याह अँधेरा चुपके से कुछ  रंग बदल के एक पल में यूँ ही अनायास सा जाने को व्याकुल बदहवास सा रंगों के सागर में गुम सा जाता है रोशनी के अतिरेक से लज्जित दबे पाँव आहिस्ता कहीं छुप सा जाताContinue reading “अक्सर देखा है …”

तुम हो…

अनजानी सी , कुछ बिसरी सी   यादों के फलक पर , हलकी धूप सी छितरी सी   समय के क़दमों तले गुम जिसे कर आये   यादों की कोमल धरती पर, उस घास सी बिखरी सी   गुम होती सी , फिर आती वो, पल में गायब हो जाती सी ,   यादों केContinue reading “तुम हो…”